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ताहिरा कश्यप ने लॉकडाउन के दौरान अपनी चौथी किताब पूरी की, सेहत का भी रख रही हैं ख्याल
Khabar India TV | 11th Jul, 2020 11:26 AM

मुंबई: लेखक-फिल्मकार ताहिरा कश्यप खुराना ने कोरोनोवायरस लॉकडाउन के दौरान अपनी चौथी किताब, 'द 12 कमांडेंट्स ऑफ बीइंग ए वूमन' पूरी कर ली है। ताहिरा इस साल के अंत तक अपनी किताब रिलीज करने की योजना बना रही है।

ताहिरा ने कहा, "मैंने आखिरकार 'द 12 कमांडेंट्स ऑफ बीइंग ए वुमन' लिखना खत्म कर लिया है और यह एक बहुत ही समृद्ध अनुभव रहा है। मुझे लगता है कि बहुत सारी महिलाएं किताब से जुड़ाव महसूस करेंगी और पुरुषों के लिए यह बहुत दिलचस्प होगा, जिससे वे इसे पढ़ेंगे। लॉकडाउन की अवधि मुझे किताब को खत्म करने और उसके लिए पर्याप्त समय देने के लिए एकदम सही थी।"

डेटिंग के समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते थे आयुष्मान खुराना और ताहिरा कश्यप

लेखन के अलावा ताहिरा ने लॉकडाउन के दौरान अपने स्वास्थ्य की उचित देखभाल करने की भी कोशिश की। लॉकडाउन प्रतिबंध में मिली ढील के साथ ताहिरा ने अपने घर के बाहर साइकिल चलाना शुरू कर दिया।

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I took to cycling as a sport and also to declutter mentally but I realised I was viewing the same roads, trees and houses with a different perspective. I was finding beauty in nature that I had never before appreciated let alone acknowledged. It is extremely therapeutic. Earlier on it meant only exercise for the physical aspect but now it has become a therapy for my mental well being and happiness too. And I have doing some photography with my mobile too (have shared some pictures earlier on)! The pictures might not be the best ones but each one has a lot of my heart- as I truly valued and appreciated what I saw. . . . #cycling #cyclingchronicles #cyclinglife #cyclingphotos #modeoftransport #nature #smalltown #smalltownlife

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PHOTOS: आयुष्मान खुराना और ताहिरा कश्यप के घर में झलकती है क्रिएटिविटी की झलक

इस बारे में उन्होंने कहा, "मैं साइकिलिंग को एक खेल के रूप में लेती हूं और मानसिक रूप से ताजा होने के लिए भी। लेकिन मुझे एहसास हुआ कि मैं एक ही सड़क, पेड़ों और घरों को एक अलग नजरिए से देख रही थी। मैं प्रकृति में सौंदर्य की तलाश कर रही थी, जिसे मैंने पहले कभी नहीं सराहा था। यह चिकित्सा की तरह है। पहले इसका मतलब सिर्फ शारीरिक तौर पर व्यायाम था, लेकिन अब यह मेरी मानसिक भलाई के लिए एक थेरेपी बन गया है और खुशी भी।"

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