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'मेड इन चाइना' फिल्म रिव्यू- अहम मुद्दे को कंधों पर उठाते हैं राजकुमार राव और बोमन ईरानी
Oneindia | 23rd Oct, 2019 10:02 AM
  • फिल्म की कहानी

    भारत में आए एक चीनी अफसर की मौत हो जाती है और शक की सुई रघुवीर मेहता (राजकुमार राव) पर जाती है। आरोप लगाया जाता है कि अफसर की मौत रघु की कंपनी की सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवा खाने से हुई है, क्योंकि वह दवा बाघ के लिंग से बनाई जाती है। इसके बाद कहानी फ्लैशबैक में चलती है, जहां रघु अपनी कहानी सुनाता है। एक बड़ा और सफल बिजनेसमैन की चाह लिये रघु कई नए बिजनेस आइडिया पर काम करता जाता है, लेकिन हर बार असफलता ही हाथ लगती है। ऐसे में किस्मत से रघु को चीन जाने का मौका मिलता है, जहां उसे गुप्त रोग संबंधी दवा बनाने का आइडिया हाथ लगता है। उसी युक्ति के साथ वह भारत वापस आता है और सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर वर्धी (बोमन ईरानी) के साथ मिलकर बिजनेस की शुरुआत करता है। लेकिन भारत जैसे देश में जहां सेक्स शब्द को भी लोग दबी जुबान में बोलने हैं, वहां गुप्त रोग की दवा बेचना रघु के लिए कैसा संघर्ष साबित होता है, और वह इससे निकल पाता है या नहीं.. यह देखने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना होगा।


  • अभिनय

    राजकुमार राव और बोमन ईरानी पूरी तरह से फिल्म अपने कंधों पर लेकर चलते हैं। बेदम कहानी में भी ये दोनों कलाकार अपना सर्वश्रेष्ठ देते नजर आए। गुजराती बिजनेसमैन रघुवीर मेहता के किरदार में राजकुमार बेहद सटीक लगे हैं। गुजराती लहजा, चाल ढ़ाल से लेकर हर भाव उन्होंने बखूबी पर्दे पर उतारा है। वहीं, बोमन ईरानी का काम भी जबरदस्त है। सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर वर्धी बने बोमन इस फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्होंने अपने किरदार को पूरी संजीदगी के साथ निभाया है। राजकुमार की पत्नी के रोल में मौनी रॉय को ज्यादा मौका नहीं दिया गया। वहीं, बतौर सह कलाकार सुमित व्यास, गजराज राव, परेश रावल और अमायरा दस्तूर ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।


  • निर्देशन व तकनीकि पक्ष

    अपनी गुजराती फिल्म के लिए राष्ट्रीय अवार्ड जीत चुके निर्देशक मिखिल मुसाले ने एक गंभीर और दबे हुए विषय को मनोरंजन के साथ पेश करने की कोशिश की है। उनके पास एक दमदार स्टारकास्ट थी, एक अच्छा विषय था, लेकिन फिर भी फिल्म अपना प्रभाव छोड़ने में असफल रही। फिल्म के पहले हॉफ में ही कहानी इतनी ढ़ीली पर जाती है कि विषय भी ऊबाऊ लगने लगता है। लिहाजा, दूसरे हॉफ में कंटेंट होने के बावजूद फिल्म बांध कर रखने में असफल रहती है। निर्देशन, छायांकन और संवाद, सभी विभाग में फिल्म कमज़ोर दिखी। बतौर एडिटर मनन अश्विन मेहता भी कहानी को मजबूती से बांधते नहीं दिखे। नतीजतन फिल्म काफी बिखरी सी है और क्लाईमैक्स के बाद भी कई सवाल अनकहे- अनसुने रह जाते हैं। सचिन जिगर द्वारा दिया गया संगीत भी औसत है।


  • देंखे या ना देंखे

    राजकुमार राव के फैन हैं और उनके अभिनय को पसंद करते हैं तो ये देखी जा सकती है, लेकिन मनोरंजन की उम्मीद ना करें। दिवाली पर परिवार के साथ एक अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं, तो मेड इन चाइना आपके लिए सही चयन नहीं होगा। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 2 स्टार।




सेक्स और गुप्त रोग पर समाज में फैली चुप्पी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पिछले कुछ सालों में कई फिल्में सामने आई हैं। शुभ मंगल सावधान, खानदानी शफाखाना जैसी फिल्मों में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की गई है। ऐसे में इस विषय को नए अंदाज़ में सामने लेकर आने की कोशिश की है निर्देशक मिखिल मुसाले ने।

''जब हम खांसी, सर्दी, बुखार और अन्य बीमारियों पर बात करें तो ठीक, लेकिन सेक्स संबंधी बीमारियों पर बात करना शर्मनाक हो जाता है। क्यों ?''

कमिटि के सामने बैठे डॉक्टर वर्धी (बोमन ईरानी) जब यह संवाद करते हैं तो यह सवाल सिर्फ फिल्म के किरदारों के लिए नहीं, बल्कि दर्शकों की मानसिकता पर भी छोड़ा जाता है।

हमारे समाज में सेक्स शब्द या उससे जुड़ी बीमारियों को लेकर बात करना आज भी अनुचित माना जाता है। इसी दबी कुचली संकुचित विचारधारा को बदलने की कोशिश की गई है फिल्म मेड इन चाइना में। दमदार कलाकारों के साथ निर्देशक मिखिल मुसाले इस फिल्म को काफी मजबूत बना सकते थे। लेकिन कमजोर निर्देशन और लचर पटकथा फिल्म को औसत बना देती है।

   
 
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