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'द स्काई इज पिंक' फ़िल्म रिव्यू
Oneindia | 10th Oct, 2019 10:53 AM
  • फिल्म की कहानी

    अदिति (प्रियंका चोपड़ा) और नरेन (फरहान अख्तर) की प्रेम कहानी से फिल्म शुरु होती है। बिना आयशा (ज़ायरा वसीम) और ईशान (रोहित सराफ) की उनकी ज़िंदगी कैसी थी और बच्चों के बाद उनके जीवन में क्या बदलाव आता है, यह बखूबी दिखाया गया है। पूरी फिल्म 25 सालों के सफर में सिमटी है। एक सूत्रधार के तौर पर आयशा हमें अपनी कहानी बताती है, अपने मां- पिता, भाई से जुड़ी बातें और किस तरह वह इनकी जिंदगी में शामिल हुई। आयशा SCID नामक लाइलाज बीमारी के साथ पैदा होती है और उसके जन्म के साथ ही पूरे परिवार की जिंदगी पलट जाती है। उसके मां- पिता उसे बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं। इस दौरान पति- पत्नी के बीच कुछ गलतफहमियां भी होती है, कभी भावनाओं का गुबार भी फूटता है। लेकिन सभी एक दूसरे की हिम्मत बने रहते हैं। जन्म से मृत्यु के बीच उम्मीद और सकारात्मकता की कहानी है 'द स्काई इज पिंक'..


  • अभिनय

    अदिति और नरेन चौधरी के किरदारों में प्रियंका चोपड़ा और फरहान अख्तर ने पूरी ईमानदारी दिखाई है। बतौर माता- पिता दोनों के किरदारों को निर्देशक ने कई परतों में दिखाया है। दोनों के बीच के रूमानी पल चेहरे पर मुस्कान लाते हैं.. वहीं, अपने बीमार बच्चे के लिए अंदर से टूटे मां- पिता के रूप में आपको रूला जाते हैं। दोनों के किरदारों को काफी अलग रूपरंग दिया गया है। जहां अदिति के भाव सामने दिखते हैं, वहीं पिता बने नरेन में एक ठहराव है। फिल्म की केंद्र है आयशा, जिसे निभाया है ज़ायरा वसीम ने। दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार के बाद ज़ायरा ने एक बार फिर अपने दमदार अभिनय का नमूना दिया है। लाइलाज बीमारी से जूझती आयशा में जिंदादिली का जज्बा दिखाने में ज़ायरा कामयाब रही हैं। वहीं, आयशा के बड़े भाई के किरदार में रोहित सराफ़ ने भी सराहनीय काम किया है।


  • निर्देशन व तकनीकि पक्ष

    आयशा चौधरी की जिंदगी से प्रेरित इस फिल्म को शोनाली बोस ने काफी नाप तोलकर पेश किया है। उनका निर्देशन काफी सधा हुआ सा है। पूरी फिल्म जहां संवेदनशील दृश्यों के बीच बनी है, कुछ संवाद ऐसे हैं जिसे सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। एक परिवार का हिम्मत भरा का यह इमोशनल सफर दिलों को छू जाएगा। शोनाली बोस और जूही चतुर्वेदी ने पटकथा तैयार की है, जिसकी तारीफ होनी चाहिए। पटकथा धीमी गति में आगे बढ़ती है लेकिन बेदम नहीं होती है। हालांकि फिल्म के नरेशन में कुछ कमियां दिखती हैं, जिस वजह से कुछ दृश्य अहम होते हुए भी आंखों में ठहरते नहीं हैं। बतौर एडिटर मानस मित्तल फिल्म से कुछ मिनट छांट सकते थे।


  • देंखे या ना देंखे

    इस फिल्म को देखने के लिए एक नहीं, बल्कि कई वजह हैं। लंबे समय के बाद प्रियंका चोपड़ा बॉलीवुड फिल्म में नजर आई हैं और उन्होंने बता दिया कि आज भी बॉलीवुड को क्यों उनकी जरूरत है। प्रियंका चोपड़ा का बेहतरीन काम देखना चाहते हैं तो 'द स्काई इज पिंक' जरूर देंखे। साथ ही दमदार अदाकारा ज़ायरा वसीम की यह आखिरी फिल्म है। कहना गलत नहीं होगा कि ज़ायरा ने फिल्म में जान फूंक दी है। शोनाली बोस के निर्देशन में बनी 'द स्काई इज पिंक' आंखों में आंसू लाती है, गला रुंध जाता है, लेकिन साथ ही मुस्कुराने की एक वजह भी देती है। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 3.5 स्टार।




कलाकार- प्रियंका चोपड़ा, फरहान अख्तर, ज़ायरा वसीम, रोहित सराफ़

निर्देशक- शोनाली बोस

''हर किसी का अपना स्काई (आसमां) होता है, जिसे हम किसी भी रंग में रंग सकते हैं'', शोनाली बोस के निर्देशन में बनी फिल्म 'द स्काई इज पिंक' जिंदगी और मृत्यु के बीच का सफर है, जिसे हम चाहे जो मोड़ दे सकते हैं। यह सफर संवेदनशील है, साहसिक है, साथ ही साथ आपको परिवार के प्रति एक कभी ना खत्म होने वाली अहसास की याद दिलाती जाती है।

'द स्काई इज पिंक' आयशा चौधरी की सच्ची घटना पर आधारित है। 18 वर्षीय आयशा मोटिवेशनल वक्ता थीं, जिन्हें जन्म से ही SCID (Severe Combined Immuno-Deficiency) नामक बीमारी थी। लगातार बीमारी से जूझने के बावजूद आयशा की जिंदादिली और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने TEDx, INK जैसे प्लेटफॉर्म से कई लोगों को प्रेरणा दी। जिसका जिक्र फिल्म में भी किया गया है। 18 साल की उम्र में आयशा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

   
 
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